Lal Chandan Shri Yantra – Lalita Sahasranam Se Siddh | Vastu Dosh & Dhan Badha Nivaran | 100% Original Red Sandalwood
घर की तिजोरी खाली क्यों रहती है?
पैसा आता है। रुकता नहीं।
कमाई ठीक-ठाक है, फिर भी महीने के आख़िर में हाथ खाली। उधार दिया हुआ वापस नहीं आता। कर्ज़ बढ़ता जाता है। जो काम पक्का लगता था, वो आख़िरी मौके पर ठप पड़ जाता है।
हमारे शास्त्र कहते हैं — धन कहीं से आता नहीं, वो ठहरता है। और ठहरने के लिए उसे एक स्थान चाहिए।
श्री यंत्र वही स्थान है।
यह केवल यंत्र नहीं है
यह समझ लेना सबसे ज़रूरी है।
श्री विद्या परंपरा में श्री यंत्र को केवल एक आकृति नहीं माना जाता। इसे साक्षात माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी का शरीर कहा गया है।
बीच का बिंदु माँ का स्वरूप है। नौ त्रिकोण मिलकर जो 43 त्रिकोण बनाते हैं, वे उनके अंग हैं। चारों ओर की कमल पंखुड़ियाँ उनका आसन, और सबसे बाहर भूपुर वह द्वार जहाँ से वे प्रवेश करती हैं।
इसीलिए श्री यंत्र को यंत्रराज कहा गया — सभी यंत्रों का राजा। आदि शंकराचार्य जी ने सौंदर्य लहरी में इसी की महिमा लिखी है।
जब आप इसे घर में रखते हैं, तो आप कोई वस्तु नहीं रखते — आप माँ ललिता को अपने घर में आमंत्रित करते हैं। और जिस घर में माँ आ जाएँ, वहाँ कमी किस बात की?
जहाँ श्री यंत्र होता है, वहाँ अभाव नहीं टिकता
शास्त्रों में कहा गया है कि जिस स्थान पर श्री यंत्र विधिवत स्थापित हो, वहाँ दरिद्रता ठहर नहीं सकती। माँ ललिता त्रिपुर सुंदरी स्वयं उस स्थान की रक्षा करती हैं।
धन से जुड़ी हर गाँठ यहीं खुलती है —
- कर्ज़ — चाहे कितना भी पुराना हो, उसके उतरने के मार्ग बनने लगते हैं
- ठप पड़ा काम-धंधा — जो दुकान या व्यापार बैठ गया हो, उसमें दोबारा गति आती है
- रुका हुआ पैसा — उधार दिया हुआ धन, अटका हुआ भुगतान, फँसी हुई रकम
- बरकत का न होना — कमाई तो हो, पर टिके नहीं, यह दोष दूर होता है
- अचानक आने वाले ख़र्चे — वो चोट जो हर महीने बजट तोड़ देती है
- वास्तु दोष — किसी भी प्रकार का हो, श्री यंत्र उसका निवारण करता है। घर की दिशा हो, तिजोरी का स्थान हो, या दुकान की बनावट — श्री यंत्र पूरे स्थान की ऊर्जा को संतुलित कर देता है
लाल चंदन में ही क्यों
तांबे और क्रिस्टल के यंत्र तो हर जगह मिल जाते हैं। पर परंपरा में लाल चंदन को विशेष स्थान दिया गया है।
लाल चंदन शुद्धि और सौभाग्य की लकड़ी मानी जाती है। इसकी सुगंध वातावरण को शांत रखती है। और माँ लक्ष्मी तथा माँ ललिता — दोनों को लाल वर्ण प्रिय है। लाल वस्त्र, लाल आसन, लाल पुष्प।
सबसे बड़ी बात — लकड़ी का यंत्र समय के साथ घर की ऊर्जा अपने में समा लेता है। धातु ऐसा नहीं करती।
यह 100% असली है
हमारा यंत्र असली लाल चंदन से बना है — कोई रंगी हुई लकड़ी नहीं, कोई मिलावट नहीं।
बाज़ार में जो सस्ता "लाल चंदन" बिकता है, वो अक्सर रंगी हुई साधारण लकड़ी होती है। जो वस्तु आप अपने घर के मंदिर में रखेंगे, उसमें धोखा देना हमारे संस्कार में नहीं है।
ललिता सहस्रनाम से सिद्ध करके भेजा जाता है
अधिकतर दुकानें केवल "energized" लिख देती हैं। हमारे यहाँ हर श्री यंत्र पर ललिता सहस्रनाम — माँ के एक हज़ार नामों — का पाठ करके विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की जाती है।
यानी जो यंत्र आपके हाथ में पहुँचेगा, वो पहले से जागृत होगा। आपको कहीं और जाकर कुछ करवाने की ज़रूरत नहीं।
कहाँ स्थापित करें
- तिजोरी या कैश बॉक्स में — सर्वोत्तम स्थान, जहाँ धन रहता है वहीं यंत्र रहे
- पूजा घर में — लाल वस्त्र पर, माँ लक्ष्मी के समीप
- दुकान के गल्ले में — व्यापार में बरकत के लिए
- ऑफ़िस की मेज़ पर — कार्य में उन्नति के लिए
दिशा का ध्यान रखें — यंत्र उत्तर या पूर्व दिशा में रखें, मुख पश्चिम की ओर।
स्थापना विधि
शुक्रवार का दिन सर्वोत्तम है। दिवाली, धनतेरस, अक्षय तृतीया और नवरात्रि में स्थापना विशेष फलदायी मानी जाती है।
- प्रातः स्नान के बाद यंत्र को गंगाजल से शुद्ध करें
- लाल वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें
- कुमकुम से तिलक करें, पुष्प और अक्षत अर्पित करें
- घी का दीपक जलाकर 108 बार जाप करें:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः - माँ ललिता की कृपा के लिए यह मंत्र भी जपा जाता है:
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुरसुंदर्यै नमः - हर शुक्रवार दीपक जलाते रहें और यंत्र के सामने कुछ क्षण बैठें
नोट: यह एक आध्यात्मिक एवं आस्था पर आधारित उत्पाद है। यह किसी चिकित्सा उपचार या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है।