Kapoor Dhoop Batti – कपूर धूप | Charcoal Free, Bamboo Less, 100% Herbal | घर की शुद्धि के लिए
कपूर — शुद्धि की सबसे तेज़ सुगंध
आरती का समापन कपूर से होता है, ये हर घर में देखा जाता है। कारण ये है कि कपूर जलकर कुछ पीछे नहीं छोड़ता — पूरा का पूरा वायु में विलीन हो जाता है। शास्त्रों में इसे अहंकार के नाश का प्रतीक माना गया है।
कपूर की सुगंध वातावरण की भारी और बासी ऊर्जा को तोड़ती है। जिस घर में कलह रहती हो, जहाँ मन भारी लगता हो, या जहाँ बाहर से आने वालों का आना-जाना ज़्यादा हो — वहाँ कपूर की धूप विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।
कब और कहाँ जलाएँ
- आरती के समय और पूजा के समापन पर
- घर की शुद्धि के लिए — विशेषकर संध्या के समय
- बाहर से लौटने के बाद, या घर में मेहमानों के जाने के बाद
- नए घर या दुकान में प्रवेश से पहले
- जिस कमरे में बीमार व्यक्ति रहा हो, उसकी सफ़ाई के बाद
हमारी धूप में क्या नहीं है
चारकोल नहीं — बाज़ार की अधिकतर अगरबत्तियाँ कोयले पर बनती हैं, जो जलने पर काला धुआँ देती हैं। हमारी धूप पूरी तरह चारकोल-मुक्त है।
बाँस की तीली नहीं — बाँस जलकर अपनी अलग गंध छोड़ता है और सुगंध बिगाड़ देता है। शास्त्रों में पूजा के समय बाँस जलाना वर्जित भी माना गया है। हमारी धूप बत्ती पूरी की पूरी जलती है, कुछ बचता नहीं।
कृत्रिम सुगंध नहीं — कोई रसायन नहीं, कोई नक़ली इत्र नहीं।
क्या है
100% हर्बल — प्राकृतिक कपूर, जड़ी-बूटियाँ और प्राकृतिक बंधक।
जलाने का तरीक़ा
- धूप बत्ती का एक सिरा जलाएँ, फिर फूँक मारकर लौ बुझा दें
- धूपदानी या राख वाले पात्र में खड़ी करके रखें
- शुद्धि के लिए धूप लेकर घर के हर कोने में घुमाएँ — मुख्य द्वार से शुरू करके
- खिड़की थोड़ी खुली रखें, और जलती धूप को अकेला छोड़कर न जाएँ
नोट: यह एक आध्यात्मिक एवं आस्था पर आधारित उत्पाद है। यह किसी चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। धूप जलाते समय हवा का आवागमन बनाए रखें।