Pukhraj (Yellow Sapphire) – पुखराज | Ceylon Non-Heated | गुरु का रत्न | Lab Certified

Pukhraj (Yellow Sapphire) – पुखराज | Ceylon Non-Heated | गुरु का रत्न | Lab Certified

सवा 7 रत्ती
Rs. 350,000.00
Sale price  Rs. 350,000.00 Regular price 
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Pukhraj (Yellow Sapphire) – पुखराज | Ceylon Non-Heated | गुरु का रत्न | Lab Certified

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Titleसवा 7 रत्ती

सीलोन (श्रीलंका) मूल · Non-Heated · सवा 7 रत्ती

कोई ताप उपचार नहीं, कोई रंग नहीं — पूरी तरह प्राकृतिक। लैब सर्टिफिकेट के साथ।

इतना फ़र्क़ क्यों — Non-Heated और Heated में

बाज़ार में जो पुखराज सस्ते में मिलता है, वो अक्सर heated होता है — यानी भट्टी में तपाकर उसका रंग निखारा गया होता है। दिखने में सुंदर लगता है, पर वो उसका अपना रंग नहीं होता।

ज्योतिष में यही सबसे बड़ी बात है — जो पत्थर आग से बदला गया हो, उसका प्रभाव नहीं माना जाता। ग्रह की किरणें प्राकृतिक रत्न से ही काम करती हैं।

और सीलोन का पुखराज सदियों से सबसे श्रेष्ठ माना गया है — साफ़ पानी, स्वाभाविक पीलापन, और भीतर से चमक।

इसीलिए दाम में फ़र्क़ है। सस्ता पत्थर भी पीला होता है — पर पीला होना और पुखराज होना दो अलग बातें हैं।


पुखराज — गुरु का रत्न

गुरु ज्ञान, भाग्य और धर्म का कारक है। विवाह, संतान, गुरु कृपा और जीवन की दिशा — ये सब गुरु से देखे जाते हैं।

1. जिनके लिए गुरु लग्नेश है — धनु और मीन लग्न

लग्नेश यानी स्वयं जातक। इन लग्नों के लिए पुखराज जीवन रत्न है।

क्या मिलता है: शरीर में बल और मन में स्थिरता · समाज में मान और विश्वास · रुके विवाह और संतान सुख में राहत · निर्णय में स्पष्टता

2. जिनके लिए गुरु पंचमेश है — सिंह और वृश्चिक लग्न

पंचम भाव — विद्या, बुद्धि, संतान और मंत्र सिद्धि।

क्या मिलता है: पढ़ाई और उच्च शिक्षा में सफलता · संतान से जुड़ी चिंता में राहत · मंत्र सिद्धि और साधना में प्रगति · पूर्वजन्म के पुण्य का फल खुलना

3. जिनके लिए गुरु नवमेश है — मेष और कर्क लग्न

नवम भाव — भाग्य, धर्म, गुरु और पिता। कुंडली का सबसे शुभ त्रिकोण।

क्या मिलता है: भाग्य का साथ — अटके काम बनना · सही गुरु और सही सलाह का मिलना · पिता का सहयोग · धर्म, तीर्थ और लंबी यात्रा का योग

नोट: कर्क लग्न में गुरु षष्ठेश भी बनता है — जाँच के बाद ही।

अब दूसरी तरफ़ — गलत रत्न का नुक़सान

रत्न का काम एक ही है — ग्रह को बल देना। अगर वो ग्रह आपके लग्न में मारकेश, षष्ठेश या अष्टमेश है — तो आप किसे बल दे रहे हैं?

  • मारकेश का रत्न — आयु, स्वास्थ्य, वाणी और विवाह पर चोट
  • षष्ठेश का रत्न — शत्रु, कर्ज़ और रोग बढ़ते हैं
  • अष्टमेश का रत्न — अचानक हानि

और सबसे भारी ग़लती — महादशा में उलटा रत्न

पंडित जी कहते हैं — "गुरु की महादशा चल रही है, पुखराज पहन लो।"

पर अगर आपके लग्न में गुरु मारकेश है — जैसे मिथुन और कन्या लग्न में — तो?

महादशा का मतलब है वो ग्रह पहले से अपना पूरा फल दे रहा है। उस समय उसे रत्न देना — जलती आग में घी डालना है।

परंपरा में कहा गया है कि ऐसा रत्न दुर्भाग्य को न्योता देता है — जिस परेशानी से बचने के लिए पहना था, वही दोगुनी होकर लौटती है।

पुखराज किन लग्नों को नहीं

लग्न कारण
मिथुन सप्तमेश — मारकेश
कन्या सप्तमेश — मारकेश
कुंभ द्वितीयेश — मारक स्थान
तुला षष्ठेश — शत्रु और रोग
वृषभ अष्टमेश
मकर द्वादशेश

धारण विधि

  • वज़न: सवा 7 रत्ती
  • धातु: सोना
  • उंगली: तर्जनी (दाहिना हाथ)
  • दिन: गुरुवार, शुक्ल पक्ष, प्रातः काल
  • मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः — 108 बार

विधि: गुरुवार प्रातः स्नान के बाद अंगूठी को कच्चे दूध, गंगाजल और शहद से शुद्ध करें। पीले फूल और हल्दी अर्पित करें, घी का दीपक जलाएँ, मंत्र का 108 बार जाप करें — फिर धारण करें।

पहले अपनी जन्म पत्रिका दिखा लीजिए

जो चीज़ सालों उंगली में रहेगी, उसे बिना देखे कैसे पहन लें? हम बता देंगे कि पुखराज आपके लिए है या नहीं।

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नोट: यह एक आध्यात्मिक एवं आस्था पर आधारित उत्पाद है।

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